सुनहरी किरणे Sunhari Kirne Lyrics in Hindi – Gandhi Talks

ये रोशन सुनहरी सी झिलमिलती किरणें
ये पहले पहर की सी जगमगती किरणें
ये चिड़ियों के संग संग चहकती सी किरणें
ये फूलों के रंग रंग महकती सी किरणें
दिलों में उम्मीदें जगाती सी किरणें

ये ले आती है रात के जाते जाते
सवेरे शहर भोर सुबह प्रभाते
ये सब लफ्ज लगते हैं सुने सुनाए
हम रातों के बाशिंदे सोए सुलाए

ये है नींद बेहोशी है या नशा है
ये सुस्ती ये मस्ती खुदा जाने क्या है

तूफान आए या हो कोई आंधी
हो गौतम या नानक भगत सिंह या गांधी
बहुत कोशिश की नहीं खोल पाई
आंखों पे जो पट्टियां हमने बांधी
हम सब है तारीत रातों के आदी
हमें रात में ही मिली थी आजादी

हमको तो बस ओढ़े रखनी है चादर
हो रेशम या मलमल या खाकी या खादी

ये अंधियारी चादर या कोई कफ़न है
वो सूरज ना जाने कहां पर दफन है
अगर खो गया है उसे उसे ढूंढ ला दो
अगर सो गया है तो उसको जगा दो
जो बेहोश है तो जरा होश ला दो
अगर मर चुका है तो मिलकर जला दो

जलेगा तो कुछ रोशनी होगी शायद
दुनिया में कुछ खलबली होगी शायद
कहानी ये तुमने सुनी होगी शायद
कुछ सुबहे यूं भी बनी होगी शायद
कुछ सुबहे यूं भी बनी होगी शायद
कि कुछ सुबहे यूं भी बनी होगी शायद
कुछ सुबहे यूं भी बनी होगी शायद

ये रोशन सुनहरी सी झिलमिलती किरणें
ये पहले पहर की सी जगमगती किरणें
ये चिड़ियों के संग संग चहकती सी किरणें
ये फूलों के रंग रंग महकती सी किरणें
दिलों में उम्मीदें जगाती सी किरणें

ये ले आती है रात के जाते जाते
सवेरे शहर भोर सुबह प्रभाते
ये सब लफ्ज लगते हैं सुने सुनाए
हम रातों के बाशिंदे सोए सुलाए

Leave a Comment