तारे ये सारे गम के सहारे
चमकते बिखरते यहां पे
आंखों में तेरी क्या-क्या छुपा रे
क्यों ना कभी तू बताए
चमकते बिखरते यहां पे
आंखों में तेरी क्या-क्या छुपा रे
क्यों ना कभी तू बताए
तारे ये सारे गम के सहारे
चमकते बिखरते यहां पे
आंखों में तेरी क्या-क्या छुपा रे
क्यों ना कभी तू बताए
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये
दुनियां के परे मेरा मन ये डरे
कैसे करे जो है करना
ना समझे जमाना अकेला ठिकाना
संभलने में है टूट जाना
रोशनी के किनारे
अंधेरे ये संवारे
अब रोशनी भी हमको सताए
क्यूं सताए
तारे ये सारे गम के सहारे
चमकते बिखरते यहां पे
आंखों में तेरी क्या-क्या छुपा रे
क्यों ना कभी तू बताए
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये
चल कहीं धीरे-धीरे खो जाये