इज़हार हो या न हो
तेरे बिन मैं रह न पाता हूँ
ये तुझसे कह न पाता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
मेरी सांस तुझसे है
मेरी जान तुझसे है
तू ना हो तो डर सा जाता हूँ
जीते-जी मैं मर सा जाता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
ई राती नुपुई
क्यों जोनाकू नाई
ई राती नुपुई
मैं बस इतनी फ़रियाद करूँ कि
आँखें न नम हों मेरी तेरी यादों में
ना ही तू जुदा हो कभी सूनी रातों में
फिर भी उठकर जाना तेरा और न आना तेरा
धोखे के हैं नए सलीके
तभी कहूँ मैं कि
इकरार हो या न हो
तकरार तुझसे न हो
तू मेरी यार हो या न हो
बस ग़ैर मुझसे न हो
मैं कल भी तुझसे था राज़ी
मैं आज भी हामी भरता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
मैं और मोहब्बत कितनी करूँ
इतनी तो मोहब्बत करता हूँ
ई राती नुपुई
क्यों जोनाकू नाई
ई राती नुपुई
क्यों जोनाकू नाई