सही और ग़लत
से दूर है एक मैदान
मैं तुझे वहाँ मिलूंगा
से दूर है एक मैदान
मैं तुझे वहाँ मिलूंगा
ओ मेरी जान
मैं तुझे वहाँ मिलूंगा
ओ मेरी जान
शायद लिखा था मिलना तुझसे
या बस ये कोई इत्तिफ़ाक़ है
ये हर लिहाज़ से प्यार है
प्यार है
चाहे भले ही चुपचाप है
या खुलेआम इकरार है
ये हर लिहाज़ से प्यार है
प्यार है
मेरी भी ये हालत
इन दोनों है दीवाने सी
मेरी बस है चाहत
हाँ जानम तुमको ही पाने की
चाहे जो हो, चाहे जो हो
मैं रहूंगा तुम्हारा
चाहे जो हो, चाहे जो हो
मैं रहूंगा तुम्हारा
तू… तू मुझे सांसों में
महसूस होता है
तू अगर न हो तो
फिर भी तू होता है
हर नज़र मेरी क्यों
तुम तलक जाती है
भीड़ में भी आंखें
तुमसे टकराती है
तुम साथ हो तो
क्या है फ़िक्र
मंज़िल मिले या हो बस सफ़र
पूरा लगे मुझको जहाँ
चाहे ज़मीन हो या आसमा
चाहे जो हो, चाहे जो हो
मैं रहूंगा तुम्हारा
चाहे जो हो, चाहे जो हो
मैं रहूंगा तुम्हारा