मुझे याद तेरी तड़पाये
दिल तोड़ा जबसे तूने माहिया हाये
ओ रब्बा दिल तोड़ गया तू
यूँ मुझको छोड़ गया तू
इश्क दा रोग लगाके
मुझसे मुँह मोड़ गया तू
कैसी दुआ थी कैसी खुदाई
किस्मत में मेरी क्यों लिख दी जुदाई
यही इश्क़ निभाया
मुझे करके पराया
बड़ा रज के रुलाया
तुझे तरस नहीं आया
मेरा भी सोचा होता एक दफा हाये
ओ रब्बा दिल तोड़ गया तू
यूँ मुझको छोड़ गया तू
इश्क दा रोग लगाके
मुझसे मुँह मोड़ गया तू
आँखों में आँखों में बहता है जो
ये चुभता है जो ये कैसे बोलें
बातों में बातों में चुप सा है जो
ये ग़ुम सा है जो ये कैसे बोलें
क्यू है पाई मैने बेवफाई बोलो कैसे बोलें
आँखों में आँखों में बहता है जो
ये चुभता है जो ये कैसे बोलें
जीना कैसा ये जीना
जब संग मेरे तू ही ना
तन्हा मुझको है कितना कर दिया हाये
ओ रब्बा दिल तोड़ गया तू
यूँ मुझको छोड़ गया तू
इश्क दा रोग लगाके
मुझसे मुँह मोड़ गया तू
रब्बा रब्बा हाये
हो रब्बा हाये
यूँ मुझको छोड़ गया तू