पहचान जैसे पुरानी
हूं साथ मैं तुम साथिया
था गलत अपना यूं मिलना
क्यू ग़लत लगता है दिल ना
हो गलतियां चिंगारियां
मैं आग तुम हो दामन
तुम राग हो मैं सावन
मैं जहां रहूं हूं
तेरा वो जहां
दुनिया अलग मेरी तुम्हारी
इक हुई राह अब हमारी
एक चांद तू मैं रात की
दास्ताँ हूँ
दुनिया अलग मेरी तुम्हारी
इक हुई राह अब हमारी
एक चांद तू मैं रात की
दास्ताँ हूँ
हम संग रहते थे जो ये कहते थे वो
मोहब्बत ना हो जाए हमको कभी
जो हो जाए तो वही छोड़ दो
वो राहें ना जिनका हो हासिल कही
था तुमने छुआ लगी थी दुआ
हुआ जो असर वो हम पे रहा
जो कल था कभी वो ही आज है
सफ़र में तो हैं पर मंजिल नई
वो साथ था घड़ी भर
हैं जिंदगी बड़ी पर
मिलना लिखा था अपना ही यहां
दुनिया अलग मेरी तुम्हारी
इक हुई राह अब हमारी
एक चांद तू मैं रात की
दास्ताँ हूँ
दुनिया अलग मेरी तुम्हारी
इक हुई राह अब हमारी
एक चांद तू मैं रात की
दास्ताँ हूँ
यूं खाक से उठा कर
हमें इश्क़ ने बनाया
बदली हवा नया सब हो गया
यूं खाक से उठा कर
हमें इश्क़ ने बनाया
बदली हवा नया सब हो गया
दुनिया अलग मेरी तुम्हारी
इक हुई राह अब हमारी
एक चांद तू मैं रात की
दास्ताँ हूँ