तारा मेरा पूछ रहा
टूटे वो क्या तेरे यहां
माँगने को खड़ा तू ना वहाँ
तू ना वहां डूबे जाये
जैसे कारी गहराए कारी गहराए
कारी गहराए जाए
टूटे वो क्या तेरे यहां
माँगने को खड़ा तू ना वहाँ
तू ना वहां डूबे जाये
जैसे कारी गहराए कारी गहराए
कारी गहराए जाए
हुई रे कारी हुई रे
कारी के छोर पे भोर हुई रे
हुई रे कारी हुई रे
कारी के छोर पे भोर हुई रे
ये स्याही ऐसा कारा लिखे
भला ना दिखे कारा लिखे
कारे से पुते हर खुले
हर खुले रोशनदान
ओहो कारे में बस चला चले
बीते ये कारी चाहा करे
भोर दिखायेगी
क्या लिखा तेरे लिए
धूप बरसा रहा तू ना वहां
तू ना वहां डूबे
जैसे कारी गहराए कारी गहराए
कारी गहराए जाए
हुई रे कारी हुई रे
कारी के छोर पे भोर हुई रे
हुई रे कारी हुई रे
कारी के छोर पे भोर हुई रे
तू बोले पूरा हो
तारे की है तैय्यारी
तेरे लाई टूट के
रोशन अंतिम बारी
रेत में पांव तेरे
ऊपर से मन भी भारी
डूबता जाये पर
मन को है रेत प्यारी
रेत की भलाई ना
चाहे तुझको खारी
तारा ये टूटेगा
जब तू नजरें उठा री
भोर की राह को तारा
और तू थके हैं
खरी ये भारी ये
और डोनो हाय थके हैं हुई रे