रात भर चल के
रात भर ये कहां मैं ठहरा
दर बदर हूं, मदर बदर
हर जगह था पहरा जागा
रात भर ये कहां मैं ठहरा
दर बदर हूं, मदर बदर
हर जगह था पहरा जागा
खुद में मैं ही जागा
दुनिया भर से भागा
मेरा है ये पल, ये पल, ये पल
हो, ये रहा, ये दिल है जी लिया
मेरे अधूरे हैं
ख्वाहिशों के धुंध में फूल बिरे हैं
शहरों की रदों के बेचैनियों का गूंजी है
तारा टूटा जब वो तारा
जेबों में बरसारा हासिल ये