मिटाए ना मिटे देखूं मैं जितनी दफा
हवा आईनों में भी तू ही दिखे
ख्वाबों ख्यालों में तेरी खुशबूए महफूज है आज भी
सुबह शामों के दरमियान भी जिक्र तेरा ही मिले
मैंने मांगा है मजारों में तुझको सितारों से
पल भर मिल जाओ तो जरा
दिल ये टूटा है पहले भी टुकड़े हजारों में है
आकर समेटो फिर जरा जरा के
जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया पिया के जिया
जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया पिया के जिया
जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया
ए सुनो ना कैसी ये अधूरी है तेरी मेरे दरमियां
जाने ये क्या मजबूरी है क्यों कहना
बातें जो कहनी जरूरी है तुम सुनो ना
तेरी बाहों में आकर के खुद को सुला दूं मैं
सीने से लग जाओ जरा
तुम जो आदत सी हो मेरी कैसे भुला दूं मैं
फिर से दोहराऊं तो जरा
जरा के जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया पिया के जिया
जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया पिया के जिया
जिया लागे ना लागे ना जिया लागे ना लागे ना
जिया लागे ना लागे ना ओ पिया