दिल लगाने के हैं लफ़ड़े हज़ार
दुनिया प्यार के नहीं है काबिल
तोड़ देती मेरा दिल बार बार
आज तेरे हैं सगे ये कल उसके होते हैं
जो न होते किसी के वो किसके होते हैं
मैंने ग़म बताने छोड़ दिए हैं
मेरे ग़मों पर हँसे है संसार
मैंने दिल लगाना छोड़ दिया है
दिल लगाने के हैं लफ़ड़े हज़ार
मेरे अपने हैं अपनों पर वार क्या करूँ
ये वार ही तो है कि इनसे प्यार न करूँ
उस घर जाना छोड़ दिया है
जहाँ नाम के बचे हैं रिश्तेदार
मेरी माँ कोई है वो लोग
मुझे काहे को करेंगे प्यार
मैंने दिल लगाना छोड़ दिया है
दिल लगाने के हैं लफ़ड़े हज़ार
अपने हैं अपनों से कुछ शिकायत भी है
बुरा कहें अपनों को ये रिवायत भी नहीं
नाता दिल से ही तोड़ दिया है
क्या लगाने पड़ते हैं इश्तहार
मैंने दिल लगाना छोड़ दिया है
दिल लगाने के हैं लफ़ड़े हज़ार
भेजा उसने यहाँ पे किस काम के लिए
क्या हम लड़ते रहेंगे उसके नाम के लिए
इंसान बड़ी मतलबी है चीज़
सहूलियत से बदले किरदार
मैंने दिल लगाना छोड़ दिया है
दिल लगाने के हैं लफ़ड़े हज़ार
दुनिया प्यार के नहीं है काबिल
तोड़ देती मेरा दिल बार बार