ओ इक दरद दा रिश्ता जो
टूट ना पाया
हाथ तूने छोड़ा पर
साथ छूट ना पाया
टूट ना पाया
हाथ तूने छोड़ा पर
साथ छूट ना पाया
तुझ को कभी ना याद किया पर
रब दी सौ तैनू भूल ना पाया
वे माहिया तेरे वेखण नू
चुक चरखा गली दे विच पावा
वे लोका पाने मैं काट दी
तंग तेरिया यादां दे पनवा
ओ…
रब्बा कुबूल है
मुझ को मेरी खता
रब्बा कुबूल है
मुझ को तेरी सज़ा
ले ले ये जान मेरी
ले ले जहां ये मेरा
लौटा दे बस मुझे
तू प्यार फिर ये मेरा
लौटा दे दीन मेरा
लौटा दे मेरा ईमान
रब्बा क़ुबूल कर
बस मेरी इक दुआ
कह दे यार से मेरे अब ना जा
हो अब लौट के घर को आ जा
वे माहिया तेरे वेखण नू
चुक चरखा गली दे विच पावा
वे लोकी सारे पुछदे ने
वे तू लौट के घर माही आ जा
ओ घर आ जा घर आ जा