हम भी तोड़े हैं गए
ऐसे तन्हा तो न थे
तन्हा छोड़े हैं गए
देरे हमको माफ़ी
कर बैठे गुस्ताखी
होता है दुःख काफी
बाबू पछताये
दिल में सब रखते हैं
खुशियों को तरसते हैं
खुद पे ही हँसते हैं
कहाँ मुँह को छुपाए
खैर है यारों कम से कम
जान से जान ना पाए हम
इंकार के बहाने कई बार
करते करते
हमने वहीं लगाया दिल
जहाँ दिल लगाना मना था
आख़िर वहीं किए सजदे जहाँ
सर झुकाना मना था
क्यूँ ज़िंदगी बिता दी जहाँ पे
इक पल बिताना मना था
क्यूँ उस गली में रहते थे हम
जहाँ रोज़ जाना मना था
मेरे चैन के चिथड़े-चिथड़े हुए
इस दिल के टुकड़े कितने हुए
मेरी कलम के आँसू बहने लगे
इस नज़्म को लिखते-लिखते हुए
हर साँस गवाही भरती मेरी
के प्यार ना करियो राजा वे
सुर ऐसे-ऐसे लगते हैं
जब बजे प्यार का बाजा वे
बे-दर्दी ने नशा कराया जो
उस नशे में झूमूँ सारा दिन
दिल टूटा लेके हाथों में
मैं मज़े में घूमूँ सारा दिन
अब कोई भी काम ना आए
रब्ब ही तेरी जान बचाए
तू मुझे उनमें फँसता दिखे हैं
जो खुद तूने जाल बिछाए
अब नहीं तेरी आँखों में मस्ती
तू बस है बहानों की बस्ती
तेरी हर एक बात है सस्ती
तुझपे तो रोना भी ना आए
हमने वहीं लगाया दिल
जहाँ दिल लगाना मना था
आखिर वहीं किए सजदे
जहाँ सर झुकाना मना था
क्यों ज़िंदगी बिता दी जहाँ पे
एक पल बिताना मना था
क्यों उस गली में रहते थे
हम जहाँ रोज़ जाना मना था