गुनगुनी धूप है, शाम है
मैं भी हूँ, वो नहीं
वो नहीं जो मेरे नाम है
शोर है, फ़िक्र है
मैं भी हूँ, वो नहीं
है यही सच मेरा
है यही सच तेरा
नफ़रतों में मोहब्बत को ना भूलना
हाथ जो है उठा, गर्दनें जो कटीं
वो भी मैं, वो भी तू, आदमी
नब्ज़ है, ख़ून है, साँस है, जिस्म है
ज़िंदगी जीने की ये भला कौन सी किस्म है
नाम भी है मेरा, शक्ल भी है मेरी
दोनों में जो था मैं, वो नहीं
देरे नाना देरे नाना देरे नाना देरे नाना
देरे ना देरे ना देरे ना देरे ना देरे नाना
देरे नाना देरे नाना देरे नाना देरे नाना
देरे ना देरे ना देरे ना देरे ना देरे नाना
देरे नाना देरे नाना देरे नाना देरे नाना
धूम ता धूम ता धूम ता धूम ता धूम ता
धूम ताना धूम ताना धूम ताना धूम
तुम ही हो जो दूर दूर दिल करते
तुम ही हो जो रोम रोम दुख भरते
तुम ही हो जो शाख शाख बन कटते
तुम ही हो जो प्यार प्यार नित रटते
तुम ही तो भीड़ और दर्पण जाते
तुम ही तो लालचों से छन जाते
तुम ही शहर शहर फिरते हो
तुम ही जो रोज आँखों से गिरते
तुम ही हो जो साफ साफ सब दिखते
तुम ही हो जो झूठ-मूठ सब लिखते
तुम ही हो जो रोज रोज बढ़ जाते
तुम ही हो जो जीते जी ही मर जाते
किस तरह अब मेरे दर्द का हो बयान
लफ़्ज़ तो खो गए चीख में
मेरे टुकड़े हुए
मेरे टुकड़े तो तुम मोड़ दो भीख में
मैं अभी हूँ यहीं, वो नहीं