आ आआआ आआआ आ
जो तुम छोड़ के गई, हमने कहा
कोई बात नहीं
भीड़ में भी मुस्कुराए
दिल का टूटा ना यक़ीन
तुम्हारे बाद का मौसम
थोड़ा ठहरा सा रहा
खुद को समझाया, दिल का रोना
कोई बात नहीं
सपनों में ही सही
तुम्हें देखा करेंगे
आँखें बंद ही सही, रोशनी
से क्या करेंगे
कम्बख़्त नींद को देखो, तुमसे
लिपट के चली गई
हम तन्हा रातों में
खुद से ही बातें किया करेंगे
जो तुम छोड़ के गई, हमने कहा
कोई बात नहीं
दर्द को भी ओढ़ लिया
जैसी हो सौगात नई
नींद बाज़ारों में ढूँढें
सुकून महँगा हुआ
इश्क़ तो हार गया पर ये
मेरी मात नहीं
बाज़ार में नींद खरीदने लगे हैं हम
हर ख़्वाब की कीमत पूछने लगे हैं हम
दवा काम ना आई तो जाम से जीने लगे हैं
ज़हर को भी थोड़ा सा आबेहयात समझने लगे हैं हम
लोग कहते हैं वक़्त हर ज़ख्म भर देता है
वक़्त ही तो था जिसने हमें जुदा भी किया
तुम्हारा ज़िक्र आए जब कभी शीशे के प्यालों में
होठ हँसते हैं, आँखें भीग जाती हैं सवालों में
जो तुम छोड़ के गई, हमने कहा
कोई बात नहीं
सिखा दिया ख़ामोशी ने
हर एक सच भी कहने की बात नहीं
नींद बाज़ारों में ढूँढें
सुकून महँगा हुआ
इश्क़ तो हार गया पर ये
मेरी मात नहीं
अब ना कोई शिकवा है
ना कोई सवाल बाकी
तुम जहाँ भी रहो, रहो खुश
बस यही ख़याल बाकी है
हम ज़िंदा तो हैं, पर उसी मोड़ पे ठहरे हैं
जहाँ तुमने कहा था “मैं लौटूँगी”
और हम मान बैठे थे